कांग्रेस - भाजपा आमने-सामने,
ओबीसी नेता मिले सीएम से ........
सरकार किसी न किसी बहाने टालना चाहती है,पंचायत चुनाव - कांग्रेस
भोपाल। मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव भले ही टल गए हों लेकिन भाजपा और कांग्रेस अभी भी इसको लेकर आमने-सामने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आज जहां पत्रकारों से चर्चा में कहा है कि कांग्रेस ने 1994 से पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया था और मांग की है कि दो महीने के भीतर पंचायत चुनाव रोटेशन और परिसीमन के साथ कराए जाएं। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सांसद केपी यादव के नेतृत्व में ओबीसी नेताओं ने मुलाकात की और उन्होंने अदालत में सरकार ओबीसी आरक्षण पर पक्ष रखेगी। पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी परिस्थितियों में अब राज्य सरकार ओबीसी के वास्तविक आंकड़ों को जुटाने में लगी है। इसके लिए भाजपा के ओबीसी नेताओं से लगातार मुलाकात की जा रही है। पिछड़ा वर्ग आयोग से भी मीटिंग हुई हैं। इसी क्रम आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आज सांसद केपी यादव के साथ कई ओबीसी नेता सीएम चौहान से मुलाकात करने पहुंचे। ओबीसी नेताओं को सीएम ने आश्वास्त किया कि अदालत में सरकार ओबीसी की पूरी जानकारी पेश करेगी।
कांग्रेस जाएगी गांव-गांव
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी पत्रकारों से चर्चा में पंचायत चुनाव पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी न किसी बहाने से पंचायत चुनाव को टालना चाहती है। पंचायत चुनाव में कांग्रेस की 1994 की सरकार ने ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया था। 2019 में कांग्रेस सरकार ने संविधान की व्यवस्था के अनुसार रोटेशन व परिसीमन की कार्रवाई की थी। इसके खिलाफ उस समय कई याचिकाएं लगी थीं और उच्च न्यायालय ने तब सरकार के निर्णय को स्थिर रखा था। मगर 2021 में सरकार ने उस रोटेशन व परिसीमन को अध्यादेश से निरस्त कर दिया जिसके खिलाफ याचिका लगी। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र शासन से संबंधित प्रकरण में अपने आदेश के क्रियान्वयन के लिए मध्य प्रदेश राज्य व मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ताओं को कहा। कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भाजपा गलत ढंग से प्रचारित कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा और कांग्रेस अब गांव-गांव जाएगी।
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